बालक पृथ्वी सिंह गौरवशाली 5 Amazing Unknown History | Balak Prathivi Singh

बालक पृथ्वी सिंह इतिहास

मित्रों भारत वीरो की जन्म भूमि कहलाता है, यहाँ सैकड़ो वीर पुरुष हुवे जिन्होंने अपनी वीरता हे इतिहास में अपना नाम अमर किया है, Balak Prathivi Singh का इतिहास में नाम स्वर्ण अक्षरों से दर्ज है, जब जब वीरो का नाम आता हे तो राजस्थान का नाम सबसे उपर आता हे !

राजस्थान  में कुछ ऐसे भी वीर हुवे हे जिनको इतिहास में शायद वो स्थान प्राप्त नहीं हुवा जिनके वो हक़दार थे। आज हम आपको एक ऐसे ही वीर बालक पृथ्वी सिंह की वीरता और शौर्य की गाथा सुनाने जा रहे हे ! जानकारी पसंद आये तो शेयर जरुर करना सबके साथ मित्रों…

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Balak Prathivi Singh की गौरवगाथा

एक बार औरंगजेब के दरबार मे एक शिकारी जंगल से बहुत बडा भयानक शेर पकड कर लाया ! शेर को लोहे के पिंजरे में बंद किया गया था, पिंजरे में बंद शेर बार बार दहाड रहा था।

ओरंगजेब अपने दरबार में पिंजरे में बंद भयानक शेर को देख इतराते हुए बोला “इससे बडा भयानक शेर दूसरा नही नहीं है” ! ओरंगजेब के दरबार में बैठे उसके गुलाम स्वरुप दरबारियो ने भी उसकी हाँ में अपनी हाँ मिलाई !

बालक पृथ्वी सिंह
मुग़ल दरबार ( काल्पनिक चित्र )

परन्तु जोधपुर के महाराजा यशवंत सिंह ने ओरंगजेब की इस बात से असहमति जताते हुए कहा कि “इससे भी अधिक शक्तिशाली शेर तो हमारे पास है” ! बस फिर क्या था महाराजा यशवंत सिंह की बात को सुनकर मुग़ल बादशाह ओरंगजेब बड़ा क्रोधित हो उठा।

उसने यशवंत सिंह से कहा कि यदि तुम्हारे पास इस शेर से अधिक शक्तिशाली शेर है, तो अपने शेर का मुकाबला हमारे शेर से करवाओ, लेकिन तुम्हारा शेर यदि हार गया तो तुम्हारा सार काट दिया जाएगा।

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महाराजा यशवंत सिंह ने ओरंगजेब की चुनौती को सहर्ष स्वीकार किया ! अगले दिन किले में शेरों की लड़ाई का आयोजन किया गया, जिसे देखने के लिए भारी भीड़ इकट्ठी हुई।  ओरंगजेब अपने स्थान पर एवं महाराजा यशवंत सिंह अपने बारह वर्षीय पुत्र Balak Prathivi Singh के साथ अपना आसन ग्रहण किये हुए थे !

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ओरंगजेब ने यशवंत सिंह से प्रश्न किया “कहाँ है तुम्हारा शेर ?”  यशवंत सिंह ने ओरंगजेब से कहा “तुम निश्चिन्त रहो मेरा शेर यहीं मौजूद है, तुम लड़ाई शुरू करवाओ “ !

ओरंगजेब ने शेरों की लड़ाई शुरू की जाने की घोषणा की।  ओरंगजेब के शेर को लोहे के पिंजरे में छोड़ दिया गया ! अब बारी थी महाराजा यशवंत सिंह के शेर की !

महाराजा यशवंत सिंह ने अपने बारह वर्षीय पुत्र बालक पृथ्वी सिंह को आदेश दिया कि आप शेर के पिंजरे में जाओ और हमारी और से ओरंगजेब के शेर से युद्ध करो ! यह सब देख वहां उपस्थित सभी लोग हैरान रह गए !

अपने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए Prathivi Singh पिता को प्रणाम करते हुए शेर के पिंजरे में घुस गए !

Balak Prathivi Singh
बालक पृथ्वी सिंह ( काल्पनिक चित्र )

पृथ्वी सिंह का शेर को फाड़ फेकना

शेर ने बालक पृथ्वी सिंह की तरफ देखा उस तेजस्वी बालक की आँखो में देखते ही वह शेर पूंछ दवाकर अचानक पीछे की ओर हट गया।

यह देख किले में उपस्थित सभी लोग हैरान रह गए।  तब मुग़ल सैनिकों ने शेर को भाले से उकसाया, तब कहीं वह शेर Balak Prathivi Singh की और लपका।

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शेर को अपनी और आते देख बालक पृथ्वी सिंह पहले तो एक और हट गए बाद में उन्होंने अपनी तलवार म्यान में से खीच ली, अपने पुत्र को तलवार खीचते देख महाराजा यशवंत सिंह जोर से चीखे “बेटा तू ये क्या कर रहा है , शेर के पास तलवार तो है नही फिर क्या तलवार चलायेगा, ये तो धर्म युद्ध  नही है !”

बालक पृथ्वी सिंह गौरवशाली 5 Amazing Unknown History | Balak Prathivi Singh
बालक पृथ्वी सिंह शेर का वध करते हुवे ( काल्पनिक चित्र )

Prathivi Singh का युद्ध 

पिता की बात सुनकर बालक पृथ्वी सिंह ने तलवार फेक दी और वह शेर पर टूट पड़े , काफी संघर्ष के बाद उस वीर बालक पृथ्वी सिंह ने शेर का जबडा अपने हाथो से फाड दिया, और फिर उसके शरीर के टुकडे टुकडे कर के फेंक दिये।

सभी लोग वीर Balak Prathivi Singh की जय जय कार करने लगे, शेर के खून से सना हुआ जब बालक पृथ्वी सिंह बाहर निकले तो राजा यशवंत सिंह जी ने दौडकर अपने पुत्र को छाती से लगा लिया।

(कहा जाता हे की उस दुष्ट और कपटी मुग़ल ने बालक पृथ्वी सिंह को उपहार स्वरूप् वस्त्र दिए जिनमे जहर लगा हुआ था..!!
उन्हें पहने के बाद Balak Prathivi Singh  की मृत्यु हो गयी थी..!! .)

ऐसे थे हमारे पूर्वजों के कारनामे जो वीरता से ओतप्रोत थे।  जय माँ भवानी …